कांग्रेस सांसद गोरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक मामले में असम की राजनीति में गर्माहट तेज है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर है। ऐसे में अब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की तरफ से लगाए गए आरोपों पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वह शुरू से ही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच के खिलाफ नहीं हैं और चाहते हैं कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
गौरव गोगोई ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को इस मामले में इतनी ही गंभीर चिंता थी, तो वह पिछले छह महीनों से चुप क्यों थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह मामला सच में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, तो मुख्यमंत्री ने अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया।
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सीएम के आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
गोगोई ने आगे मुख्यमंत्री द्वारा की गई लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस को राजनीति से प्रेरित बताया। गौरव गोगोई के मुताबिक, इसका असली कारण कांग्रेस पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा यह खुलासा किए जाने के बाद कि मुख्यमंत्री के परिवार के पास 12,000 बीघा जमीन है, मुख्यमंत्री दबाव में आ गए और उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। गौरव गोगोई ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री खुद को चाणक्य समझते हैं, लेकिन असम की जनता सच्चाई जानती है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पारदर्शिता के पक्ष में है और इसलिए एसआईटी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान जाने की बात पर क्या बोले गोगोई
इसके साथ ही गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी 2013 में काम के सिलसिले में पाकिस्तान गई थीं और वह उस 10 दिन की यात्रा में उनके साथ थे। उन्होंने कहा कि उस समय एसआईटी ने उन्हें इस यात्रा के बारे में कभी पूछताछ नहीं की। गोगोई ने कहा कि असम में मुख्यमंत्री के वीडियो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत और हिंसा भड़काने वाले हैं। उन्होंने इसे गंभीरता से लिया है और इसे रोकने के लिए कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
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‘खास समुदाय को निशाना बना रहें सीएम’
गोगोई ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट पिछले छह महीने से मुख्यमंत्री के आरोपों को साबित करने में कोई मदद नहीं कर रही। गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री समाज के एक खास समुदाय को निशाना बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो शेयर कर “सामूहिक हत्या” के माहौल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने छोटे बच्चों पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार करेंगे।
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